Sunday, October 6, 2013

Zara Sochiye??

मैंने पहले भी कई बार भारत देश में महिलाओं की घटती इज्ज़त और उनके घटते सम्मान और अधिकारों पर चिंता अपने लेखों द्वारा व्यक्त की है और उनके कारणो का भी पता लगाने की भी कोशिश विभिन्न शोधों , आंकड़ों तथा लोगो से बातचीत कर के की है ! इसी क्रम में आज एक अन्य कारण का मुझे ध्यान आया जो आप सब को बता रहा हूँ !
रक्षाबंधन से एक दिन पहले मेरे मित्र के लड़के से मैंने विध्यालय न जाने का कारण पूछा तो उनसे कहा अगर आज कक्षा में गया तो बहुत सी लड़कियां उसको राखी बांध देंगी ! यानि के कुछ लड़कियां उसको भाई बनाना चाहती हैं पर वो कुछ लड़कियों को बहन नहीं बनाना चाहता ! अपनी बहन से राखी बंधवा सकता है पर किसी और की बहन या लड़की से नहीं ! ये तो छोड़िए अगर बेटे की टीचर लड़की या महिला है तो रोज़ उससे मज़ाक किया जाता है " तेरी टीचर बड़ी अच्छी है" - - " आज क्या बोला तेरी टीचर ने" इस तरह हम बच्चे के कोमल मन में लड़कियों या महिलाओं के प्रति गलत भावना भर देते हैं अनजाने में ! इसी तरह कालिज में भी लड़के 10 लड़कियों को दोस्त बना सकते हैं पर 2 को बहन नहीं बना सकते और दूसरी तरफ लड़कियां भी 10 दोस्त बना लेती हैं पर 2 भाई उनको नहीं मिलते ..क्या बात है ? माँ - बाप भी सोने पे सुहागा कर देते हैं जब लड़का किसी अंजान लड़की के साथ या लड़की किसी अंजान लड़के के साथ स्कूल , कालिज जाते समय या फिर आते समय दिखाई दे जाए तो इस से पहले लड़का -लड़की जवाब दें -, माँ - बाप सहज ही कह देते हैं बेटे तुम्हारी / तुम्हारा दोस्त है ? और न चाहते हुये भी या अंजान होते हुये भी दोनों की दोस्ती के बारे में बात घर पर भी सुनाई देती है उसके बाद लड़के-लड़की को शह भी मिल जाती है किसी न किसी रूप में ! रही सही कसर मोबाइल निकाल देता है , फिर भी कुछ बचा तो इंटरनेट ! पर माँ या बाप दोस्ती का सही मतलब कभी नहीं समझाते उनको , नतीजा लड़कियों के लिए दोस्त का मतलब घूमना - फिरना , खाना - पीना , फिल्म देखना इत्यादि और लड़को के लिए मौज - मस्ती , शराब -शबाब का मतलब दोस्त हो जाता है ! उसके बाद वही दोस्त चाहे लड़का हो या लड़की अपने दोस्त का किसी भी रूप में मौका पा कर कैसा भी शोषण कर देता है ! और तब , तब माँ - बाप अपने बच्चो को बोलते हैं ..ये , ऐसे दोस्त हैं तुम्हारे ..! पर भूल जाते हैं की शिक्षा अपने अपने घर से ही दी थी ! पहले जब हम अपने गाँव में जाते थे तो गाँव की तमाम लड़कियों को गाँव के सभी लड़के चाहे वो किसी भी धर्म , संप्रदाय , जाती के हों अपनी बहन मानते थे क्योंकि घर - परिवार से उनको शिक्षा मिली थी ! मैं ये नहीं कहता की आप हर लड़की के आगे कलाई ले के खड़े हो जाओ की ले राखी बांध या लड़कियों से ये नहीं कहता की हर लड़के को राखी बांधने चली जाए लेकिन सामाजिक मर्यादा का ख्याल तो रख लो ! इस बात की मिसाल आज मुझे खुद मिली जब इंटरनेट पर चैट करते हुये एक लड़की ने मुझे भैया कहा और जवाब में मेंने उसको बोलो बहना कहा और उसके बाद हमारी बात अलग- अलग विषयों पर होती रही उसी संवाद के दोरान एक बात पर मेंने लड़की को “YES MY SISTER” कहा तो उसने जवाब दिया " HELLO I M NOT YOUR SISTER " मैं हैरान रह गया और लड़की से इस बात का कारण पूछा परंतु उसने कोई जवाब नहीं दिया ये बात और है की हमने उसके बाद भी काफी अच्छी बातें आपस में की ! एक बात और हम सब हमारे बच्चों से जब भी पूछते हैं की इस लड़के या लड़की को कैसे जानते हो तो आमतौर पर सब कहते हैं “FACEBOOK FRIEND है” , पर कोई किसी के बारे में ये नहीं कहता की ये मेरी “ FACEBOOK SISTER YA BROTHER है ?” न तो माँ- बाप न घर के कोई और लोग इस बात पर कोई समझदारी दिखते हैं ! आप सब लोग को बताना चाहता हूँ की पाश्चात्य यानि के पश्चिमी सभ्यता एक छलावा है और उसके नाम पर अपनी सभ्यता को भूलना या छोड़ देना बहुत बड़ी मूर्खता है ! मैं अपने भारत देश के सभी माँ- बाप , भाई - बहनों , दोस्तो -मित्रो से अपील करता हूँ के अभी भी समय है अपनी संस्कृति , अपनी धरोहर , अपने संस्कारो के साथ आगे बड़ो तब आप सब देखेंगे के हमारी माताओं , बहनों , बहुओ को हर जगह , हर घर , हर दफ्तर , देश और विदेश के कोने- कोने में आदर - सम्मान अपने आप मिलेगा !
आज मैं आप सब से कोई माफी नहीं मागूंगा प्रार्थना नहीं करूंगा क्योंकि मैं भी जानता हूँ और आप सब भी जानते हैं की मैं सही कह रहा हूँ !